गोसंरक्षण - सम्पूर्ण राजस्थान तथा बनासकांठा (गुजरात) क्षेत्र में गोसेवाश्रमों तथा अन्य अस्थाई गोसेवा  केन्द्रों पर लाखों की संख्या में गोवंश जो अत्यन्त कुपोषित, अपंग, रोगग्रस्त तथा कसाईयों से मुक्त कराये हुए की सेवा संस्था द्वारा हो रही है । इसके अतिरिक्त श्री पथमेड़ा गोधाम महातिर्थ की प्रेरणा से गठित राजस्थान गोरक्षा समिति के माध्यम से सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश में स्थापित सैकडों गोशालाओं एवं लाखों गोपालकों को समय-समय पर यथावश्यक संरक्षण, सहयोग, मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जा रहा है  

 

गोपालन - राजस्थान तथा गुजरात के जिलों के कई गांवों में स्थापित गोसेवा आश्रमों में आश्रमों में प्रतिवर्ष दस से बारह हजार गोवंश का पालन पोषण करके तैयार किया जाता है । इनकी सेवा में पौष्टिक आहार, हरा चारा, औषधि, स्नान, आदि से प्रेम द्वारा पूर्ण देखभाल की जाती है तथा इनमें से विभिन्‍न गो प्रजातियों का चयन करके वर्गीकरण होता है । श्री पथमेड़ा गोधाम महातीर्थ इन वर्गीकृत गो बछोड़ियो को संवर्धन हेतु प्रदेश तथा देश के विभिन्‍न गोशालाओं, गोपालक किसानों तथा गोसेवाश्रमों को सेवा एवं आजीवन संरक्षण की शर्त पर नि:शुक्ल वितरित करता है । साथ ही 800 गांवों में गोपालक किसानों को प्रोत्साहित कर गोपालन को प्रदेश तथा देशव्यापी बनाने का प्रयास किया जा रहा है ।

 धन्वन्तरि  - गोधाम पहुँचने वाले प्रत्येक अनाश्रित, अपंग, लाचार, दुर्धटनाग्रस्त एवं कत्लखानों में जाने से छुड़ाए गये को सर्वप्रथम यही प्रवेश मिलता है । धन्वन्तरि में प्राथमिक उपचार के पश्यात गोवंश को उनकी शारीरिक स्थित एवं - सुश्रुषा की आवश्यकता के अनुसार बनाई गई विभिन्‍न श्रेणियों के विभागों में भेजा जाता है तथा गंभीर स्थिति वाले गोवंश को धन्वन्तरि में पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलने तक भर्ती कर दिया जाता है ।

गोमाताओं के लिए नेत्रहीनता , गर्भाशय, फेफड़ों, हड्डियों तथा कैंसर घाव आदि से सम्बन्धित सभी बीमारीयों के अलग-अलग विभाग वर्गीकृत है । साथ ही भिन्‍न - भिन्‍न बीमारियों में दिए जाते हैं । जहाँ सर्दियों में वृद्व गोवंश को दोनों समय लापसी, मक्की, मेथी, अजवायन, सोआ, खोपरा, गुड़, तेल आदि को पकाकर खिलाया जाता है, वहीं गर्मियों में ठण्डे रहने वाले " जौ " आदि खिलाये जाते हैं ।
        इसके अतिरिक्त पूज्य श्रीस्वामीजी महाराज की प्रेरणा व मार्गदर्शन से संचालित अन्य संस्थाओं में भी उपरोक्त पद्धति से सेवा - सुश्रूषा एवं चिकित्सा होती है ।

 

गोसंवर्धन - श्री पथमेड़ा गोधाम महातिर्थ के पांच गोसेवाश्रमों श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला, श्री मनोरमा गोलोक तीर्थ नंदगाव,  श्री महावीर हनुमान गोशालाश्रम - गोलासन, श्री खेतेश्वर गोशालाश्रम - खिरोड़ी तथा श्री राजाराम गोशालाश्रम - टेटोड़ा सहित जालोर, सिरोही तथा बनासकाठां (गुज. ) के गावों में स्थापित दर्जनों गोसंवर्धन केन्द्रों द्वारा प्रतिवर्ष 8,000 से 10,000 गायों का भारतीय देशी नस्ल के सांडों द्वारा गर्भाधान करवाकर गोसंवर्धन का कार्य किया जाता है । श्री पथमेड़ा गोधाम महातीर्थ प्रतिवर्ष सैंकड़ों जोड़ी सशक्त एवं सुडौल बैल अत्यल्प शुल्क में उपलब्ध करवाता है । नाकारा सांडो को हजारों की संख्या में गोसेवा केन्द्रों में प्रवेश दिया जा रहा है । इसके अतिरिक्त 500 से अधिक गांवो में श्रेष्ठ कुलीन सांड उपलब्ध कराये जा रहे है जिससे एक साथ लाखों गायों का संवर्धन हो रहा है ।

सत्संग - श्री पथमेड़ा गोधाम महातीर्थ में गीता जयन्ती के पावन पर्व पर कामधेनु कल्याण महोत्सव तथा गोपाष्टमी के समृध्दि पर्व पर भारतीय गोकल्याण महामहोत्सव के पर्व पर भारतीय गोकल्याण महामहोतस्व के माध्यम से देश के महान् संत - महात्माओं द्वारा गोमहिमा, पंचगव्य की पवित्रता पर सदुपदेश, सच्चर्चा, सत्कथा तथा सच्चिन्तन एवं अष्टांग योग के माध्यम से व्यक्ति, समाज व राष्ट्र का नैतिक, चारित्रिक एवं आध्यात्मिक उत्थान करवाने का विनम्र प्रयास किया जा रहा है । कामधेनु कल्याण परिवार द्वारा भारतवर्ष के कई अन्य स्थानों पर भी समय-समय पर सत्संग का आयोजन किया जाता है । जिसमें लाखों लोग लाभान्वित होते हैं । स्तसंग से सेवक का जन्म होता है ओर सेवक से सेवा का सम्पादन होता है । सत्संग की दिव्य भूमि से ही मानवता का अवतरण होता है । मानवता प्राप्त मानव ही अपने लिए, जगत तथा जगदीश्वर के लिए उपयोगी होता है । एसा स्तपुरुषों का अनुभव सिद्ध मत है इसलिए सत्संग अनुपम है । श्री पथमेड़ा गोधाम के इस प्रयास के पीछे यही पावन उद्देश्य है ।

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